Saturday, February 2, 2019

वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत, The Continental Drift Theory of Wegener

Important for UPSC/PCS/UGC-NET/PGT Exam

वेगनर का मानना था कि कार्बनिफेरस युग में समस्त स्थल भाग आपस में एक पिंड के रूप में संलग्न थे इस स्थल पिंड को पैंजिया नाम दिया गया। पैंजिया के चारों ओर एक विशाल जल भाग था, जिसका नामकरण वेगनर ने पैंथालासा के रूप में किया। पैंजिया का उत्तरी भाग लारेशिया तथा दक्षिणी भाग गोण्डवानालैंड को प्रदर्शित करता था। आगे चलकर पैंजिया का विभंजन हो गया तथा स्थल भाग एक-दूसरे से अलग हो गए,यह विभाजन दो दिशाओं में प्रवाह के रूप में हुआ।

उत्तर की ओर या भूमध्यरेखा की ओर प्रवाह गुरुत्व बल तथा प्लवनशीलता के बल द्वारा हुआ, जबकि पश्चिम की ओर प्रवाह सूर्य तथा चंद्रमा के ज्वारीय बल के कारण हुआ माना गया है। परिणामस्वरूप महासागरों तथा महाद्वीपों का वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ। कार्बनिफेरस युग में दक्षिण ध्रुव अफ्रीका के वर्तमान डर्बन ( नेटाल) के पास पैंजिया के मध्य में था! 


पैंजिया का गुरुत्व बल व प्लवनशीलता के बल के कारण दो भागों में विखण्डन हुआ। उत्तरी भाग लाॅरेंशिया या अंगारालैण्ड तथा दक्षिणी भाग गोंडवानालैण्ड कहलाया। बीच का भाग टेथिज सागर के रूप में बदल गया।जुरैसिक काल में गोण्डवानालैड का विभाजन हुआ तथा ज्वारीय बल के कारण प्रायद्वीपीय भारत, मेंडागास्कर, आस्ट्रेलिया तथा अण्टार्कटिका गोंडवाना लैंड से अलग होकर प्रवाहित हो गये। 

उनके अनुसार महाद्वीपीय ठोस भाग सियाल तथा महासागरीय भू भाग सीमा का बना हुआ है सियाल, सीमा पर तैर रहा है। सीमा के ऊपर तैरते हुए पैन्जिया का विखण्डन और प्रवाह मुख्यतः गुरुत्वाकर्षण शक्तियों की असमानता के कारण हुआ। 

इस विषय से संबंधित महत्त्वपूर्ण प्रश्न तथा उसका सही उत्तर आप नीचे दिए गए वीडियो में संक्षिप्त विवरण के साथ देख सकते हैं, अगर कोई सवाल हो तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से पूछ सकते हैं!

Click Here Watch on YouTube

  धन्यवाद

जय हिंद, जय भारत!


Share on Whatsapp

No comments:

Post a Comment