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स्ट्रॉबो (Strabo)
स्ट्रॉबो ने अपनी लगन और मेहनत से उसके समय में बसे हुए संसार के जितने भागों का उसे ज्ञान था उसका वर्णन 17 पुस्तकों में विस्तृत से प्रस्तुत किया था, जिसे भौगोलिक विश्वकोश कहते हैं, भौगोलिक विश्वकोश 17 खंडों में प्रकाशित हुआ!
टॉलेमी (Ptolemy)
इनका महत्वपूर्ण कार्य खगोलीय, गणितीय भूगोल तथा मानव भूगोल आदि पर है, टॉलेमी की प्रक्षेपण, मानचित्र निर्माण, गणित और खगोलकी में विशेष रूचि के कारण ही उसने मानचित्र का निर्माण भी किया !इनकी प्रमुख पुस्तकें निम्नलिखित है
1. गाइड टू ज्योग्राफी (Geographic Syntaxis) - ज्योग्राफी कि यह ग्रंथ माला 8 खंडों में प्रकाशित की गई थी, इसमें प्रमुख सैद्धांतिक नियम का वर्णन खंड 1 में किया गया है, खंड 2 से 7 तक टॉलेमी के समय बसे संसार के ज्ञात भाग के लगभग 8000 स्थानों के नाम, स्थिति आदि का वर्णन अक्षांश व देशांतर रेखाओं की सहायता से किया गया है, साथ ही एक संसार का तथा 26 अन्य क्षेत्रों का मानचित्र भी दिया गया है, इन मानचित्रों से ही सर्वप्रथम संसार की सामान्य मानचित्रावली तैयार हुई थी,
2. ग्रहीय सिद्धांत (Hypothesis on Planet)- इसमें ग्रहों के आपसी संबंधों गतियों और उनके मध्य एक दूसरे के बीच स्थित दूरियों आदि से संबंधित परिकल्पनाओं का वर्णन किया गया है!
2. ग्रहीय सिद्धांत (Hypothesis on Planet)- इसमें ग्रहों के आपसी संबंधों गतियों और उनके मध्य एक दूसरे के बीच स्थित दूरियों आदि से संबंधित परिकल्पनाओं का वर्णन किया गया है!
पोम्पोनियस मेला (Pomponius Mela)
मेला अपने समय के विद्वानों के इस विचार से असहमत था कि पृथ्वी की आकृति गोल है अतः हुआ पृथ्वी की गोलाभ आकृति नहीं मानता था, उन्होंने अपने जीवन काल में अनेक छोटी बड़ी पुस्तकों की रचना की, लेकिन इनमें से निम्नलिखित तीन प्रमुख थी:-
1. ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmogrphy) - मेला ने इस पुस्तक में पृथ्वी को ब्रह्मांड के मध्य में स्थित बतलाया, इसमें ब्रह्मांड तथा पृथ्वी की स्थिति के संबंध में विवरण दिया गया है!
2. डीकोरोग्राफीया (Dechorographia) - इसमें मेला ने पृथ्वी को 5 भागों में बांटा है तथा उष्ण शीततोष्ण क्षेत्र का विस्तृत भौगोलिक विवरण दिया है, मेला ने अपनी पुस्तक में बतलाया है कि यूरोप महाद्वीप शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है!
3. स्काईलैक्स (skylax) - इस पुस्तक में मेला ने बताया कि पृथ्वी पर दो ध्रुव है जो उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव कहलाते हैं, मेला ने अपनी पुस्तक में निम्न चार महासागर बताए हैं:-
(i) सीथियन सागर
(ii) हिन्द महासागर
(iii) भूमध्य सागर
(iv) अनन्त सागर
प्लिनी (Pliny)
यह भूगोलवेता के साथ साथ महान गणितज्ञ भी थे उनका विचार था कि पृथ्वी पिंडा कार शक्ल में है तथा वह अपनी किल्ली पर झुकी हुई है जिस कारण ऋतु परिवर्तन होता है उसने विभिन्न प्रकार की गणना करके संसार की लंबाई-चौड़ाई ज्ञात करने का भी प्रयास किया था तथा उन्होंने बतलाया था कि पृथ्वी की पूर्व से पश्चिम लंबाई, उत्तर से दक्षिण चौराई से अधिक है, इनकी मृत्यु विसुवियस ज्वालामुखी उद्गार के दौरान हुई थी इन के प्रमुख ग्रंथ निम्नलिखित है:-
1. प्राकृतिक इतिहास (Historia Naturalis) - इसका प्रकाशन प्लिनी ने 37 खंडों में किया था शुरू के दो खंड आकाशीय पिंड तथा पृथ्वी की आकृति आकार , धरातल तथा ऋतुओं आदि के बारे में वर्णन किया गया है!
2. मिटियोरोलोजी (Meteorology) - यह प्लिनी का दूसरा महत्वपूर्ण भौगोलिक ग्रंथ था जिसमें आकाशीय पिंडों तथा उनसे संबंधित विभिन्न क्रियाओं, बिजली का चमकना, तारों का टूटना, बादलों का गरजना, सूर्य तथा चंद्र ग्रहण, ज्वालामुखी का फटना तथा भूकंप की विभिन्न क्रियाओं आदि का विवरण विभिन्न सार्थक तथ्यों के आधार पर दिया गया है!
सैनिका (Seneca)
इनका विशिष्टिकरण भौतिक भूगोल में था, इन्होंने भूकंप से होने वाली चट्टानों की संक्रिया तथा डेल्टाओं के निर्माण संबंधी विवरण प्रस्तुत किया था!
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इसी टॉपिक से संबंधित कुछ प्रश्न तथा उत्तर संक्षिप्त विवरण के साथ आपको नीचे दिए गए वीडियो में मिल जाएगा :-

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