Saturday, April 27, 2019

Endogenetic and Exogenetic forces/अंतर्जात और बहिर्जात बल!

Important for UPSC/PCS/UGC-NET/PGT Exam.

धरातलीय स्थलाकृतियां कभी स्थिर नहीं रहती, उनमें कुछ ना कुछ परिवर्तन होता रहता है, पृथ्वी की शक्तियां प्रतिक्षण कार्य शील रहती है, आंतरिक शक्तियां धरातल पर विषमता में उत्पन्न करती हैं, जबकि वाह्य शक्तिया उन  विषमताओं को कम करने का कार्य निरंतर करती रहती हैं! भूपटल पर परिवर्तन लाने वाली शक्तियां निम्नलिखित है:-

1.अंतर्जात बल (Endogenetic forces)
2.बहिर्जात बल (Exogenetic forces)

1.अंतर्जात बल (Endogenetic forces) - भूगर्भ में अदृश्य रूप से क्रियाशील शक्तियों को अंतर्जात शक्तियां कहा जाता है, इन्हें निर्माणकारी शक्तियां भी कहा जाता है, इनकी उत्पत्ति पृथ्वी में पर्याप्त गहराई पर ताप, आंतरिक चट्टानों में प्रसार एवं संकुचन अथवा रेडियोधर्मी तत्वों द्वारा ताप के विकिरण आदि से होता है, संभवत भूगर्भ में उच्च तापमान ही भूपटल पर उत्पन्न होने वाली परिवर्तनों के लिए उत्तरदाई है, अंतर्जात शक्तियां  को दो प्रकार होती है, क्षैतिज एवं लंबवत इनके द्वारा दो प्रकार की हलचलें होती हैं:-

A.पटल विरूपणकारी  हलचलें (Diastrophic Movements)
B.कास्मिक हलचलें (Sudden Movements)

A.पटल विरूपणकारी  हलचलें (Diastrophic Movements) - इसके अंतर्गत पृथ्वी के आंतरिक भाग से उत्पन्न होने वाली लंबवत तथा क्षैतिज दोनों गतियों  को सम्मिलित किया जाता है, पटल विरूपण बल मंद गति से कार्य करते हैं तथा इनका प्रभाव हजारों वर्षों बाद परिलक्षित होता है तथा बड़े आकार के  स्थल स्वरूपों का निर्माण होता है क्षेत्रीय विस्तार की दृष्टि से इस संचलन  को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है:-

(i) महादेश रचनाकरी संचलन (Epeirogenetic Movement)
(ii) पर्वत निर्माणकारी संचलन (Orogenetic Movement)

(i) महादेश रचनाकरी संचलन - यह ग्रीक भाषा के एपिरोज (Epeiros) तथा जेनिक (Genic) शब्दों से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ महाद्वीप तथा उत्पत्ति है,  इस प्रकार महादेश रचना कार्य शक्तियां वे हैं जिनसे महाद्वीपों की उत्पत्ति होती है, इन हलचलों  से महाद्वीपों का धरातल गया तो ऊपर उठता है या नीचे हंसता है!

(ii) पर्वत निर्माणकारी  संचलन - यह शब्द ग्रीक भाषा के ओरोज(Oros) तथा जेनिक (Genic) से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ पर्वतों की उत्पत्ति है, इस हलचल के कारण ही पर्वतों का निर्माण होता है, इस प्रकार की हलचल भूपटल पर समांतर होती है, अतः धरातल पर तनाव तथा संपीडन  होता है, इससे धरातल पर वलन एवं भ्रंशन होते हैं!




B.कास्मिक हलचलें (Sudden Movements) - आकस्मिक हलचलों से उत्पन्न घटनाएं आकस्मिक है तथा अचानक ही धरातल पर तथा भूगर्भ में विनाशकारी परिवर्तन हो जाते हैं, इनमें ज्वालामुखी तथा भूकंप प्रमुख है, ज्वालामुखी के उद्गार होने से क्रांतिकारी परिवर्तन हो जाते हैं, भूगर्भ में  कलाकृतियों का निर्माण होता है तथा तत्वों का निर्माण होता है धरातल पर परिवर्तन हो जाता है बदल जाता है तथा हो जाता है का निर्माण हो जाता है !

2.बहिर्जात बल (Exogenetic forces)-आंतरिक शक्तियां रचनात्मक कार्य करती है जबकि बहिर्जात बल, आंतरिक शक्तियों द्वारा निर्मित स्थलाकृति काट छांट करती हुई नवीन स्थल आकृतियों को जन्म देती है और कालांतर में धरातल का न्यूनतम करती  है इसे विनाशात्मक शक्तियां भी कहा जाता है, ट्रिवार्था ने इन्हें श्रेणीक्रम की शक्तियाँ  कहा है!

बहिर्जात शक्तियों का प्रमुख कारण अनाच्छादन करना होता है, मोंकहाउस के अनुसार अनाच्छादन में उन सभी साधनों के कार्य सम्मिलित है जिनके द्वारा पृथ्वी तल के किसी भी भाग का अत्यधिक विनाश एवं हानी होती है! बहिर्जात शक्तियों (अनाच्छादन) को दो भागों में विभाजित किया गया है:-

1.स्थैतिक शक्तियाँ - यह एक ही स्थान पर रहकर कार्य करती है और अपक्षय (Weathering) कहलाती है!

2.गतिशील शक्तियाँ - यह वह शक्तियाँ है जिनके द्वारा अपक्षय क्रिया से प्राप्त अवसादों  को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है, इन्हें अपरदन (Erosion) कहा जाता है!

इसी टॉपिक से संबंधित कुछ प्रश्न  तथा उत्तर संक्षिप्त विवरण के साथ आपको नीचे दिए गए वीडियो में मिल जाएगा :-


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