Wednesday, June 12, 2019

पटना की घटना कहां तक सही है?

अगर भारत के इतिहास में सबसे अच्छी शिक्षा प्रणाली को खंगाला जाए तो बिहार का नाम सबसे ऊपर आता है, यहां के नालंदा विश्वविद्यालय में बहुत सारे विदेशियों तक ने शिक्षा ग्रहण किया और निरंतर बिहार का नाम रोशन होता रहा, और बात अगर कुछ पिछले दशकों की की जाए तो यूपीएससी में लगातार कई दशकों तक बिहार ने बढ़-चढ़कर परफॉर्मर्स दिया है, लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी है और जहां इतिहास में सबसे अच्छी शिक्षा व्यवस्था थी वहां आज सबसे खराब स्थिति आ गई है!

 जिसका कारण है प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर  पर शिक्षकों का अभाव क्योंकि जहां आधार ही मजबूत नहीं होगा वहां इमारत कैसे मजबूत बन सकती है, प्राथमिक शिक्षा विद्यार्थियों के लिए आधार का काम करती है वहीं उच्च प्राथमिक स्तर नीर की हड्डी का काम करती है इन दोनों को मिला करके ही विद्यार्थियों को मजबूत आधार मिलता है और माध्यमिक स्तर पर तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर अच्छे परिणाम देखने को मिलता है,

पिछले दशक में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर कैसे परिणाम रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है और इसका कारण प्राथमिक और उच्च प्राथमिक पर बड़े पैमाने पर शिक्षकों का अभाव माना जा सकता है, इसके साथ-साथ जो शिक्षक वर्तमान में है भी उनमें काफी संख्या में फर्जी शिक्षक है जिनके बारे में लगातार अखबारों में खबरें छपती रहती हैं, अब जो खुद ही फर्जी हैं वह दूसरों को क्या शिक्षा देंगे इसका अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं,

  आज आलम यह बना हुआ है कि जो शिक्षक बनने की पूरी योग्यता रखते हैं वह पटना की सड़कों पर धक्का खा रहे हैं और पुलिस उस पर लाठी चार्ज कर रही है यहां तक कि महिलाओं को भी नहीं बख्शा जा रहा है जिसका एक वीडियो  नीचे दिया गया है आप चाहे तो उसे देख सकते हैं:-


एक भारतीय होने के नाते इस स्थिति को देखकर काफी दुख हो रहा है लेकिन मैं फिर भी उम्मीद करता हूं कि जल्द ही सरकार की आंखें खुलेगी और इन राष्ट्र निर्माताओं को राष्ट्र निर्माण करने का अवसर प्राप्त होगा!
 जय हिंद, जय भारत

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